मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

तुम्हारे आखिरी ख़त

तुम्हारे आखिरी ख़त में लिखी उस बात की खातिर 
भुला दूंगा तुम्हे आखिर तेरे जज्बात की खातिर ||

सुना है याद आने पर बरसते हैं शरार -ए -चश्म 
कभी रोना नहीं है अब तुम्हारी याद आने पर ||

हमारी चाहतों का क़त्ल होने दो फ़ना हमको
बदल देंगे खयालों को तुम्हारी याद की जद पर ||

जवाबी कारवाई में अमन की बात मत छेड़ो
हुए बर्बाद हैं अब तक कई परिवार सरहद पर ||

तुम्हारी मुस्कराहट पर फ़िदा हूँ जानती हो तुम
तुम्हारे आंसुओं से टूट जाऊँगा जुदा होकर ||

सुना है क़त्ल होते हैं हसीनों की निगाहों से
चलो गर्दन झुकी है फेंक दो ये वार ही मुझ पर ||

हमारे इश्क का किस्सा किसी को मत सुनाना तुम
                                                       कहेंगे बेवफा तुमको कभी हमको इसे सुनकर ||.................. मनोज

प्रेम की बात करते हो

प्रेम की बात करते हो बड़े ही गर्व में रह कर 
प्रेम जब हो गया तुमको पहन ली शर्म की चादर ||

जहाँ पर प्यार होता है वहां इनकार होता है 
वहीँ इकरार की खातिर तड़पते हैं कई रहबर ||

गुरूर-ए -इश्क में रहना रिवाज -ए -हुस्न की फितरत
अदाओं की पनाहों में मिटे आशिक कई बनकर ||

तुम्हे मालूम है जब भी हमारा दिल धड़कता है
मुझे मालूम होता है तुम्हारी याद है दिलबर ||


हमारे इश्क की कहानी सच हो गयी होती
ज़माना साथ जो देता हमारा रहनुमा बन कर ||


कभी जो आईना देखो हमें भी सोच लेना तुम
हमारी चाहतों का अक्स बनता है वहां अक्सर ||

जुदाई के कई किस्से सुने हैं प्यार के दुश्मन
जहाँ की शाजिशों में दब गए लाखों फ़ना होकर||

हमारी याद में तुम थे कलम ने बात जब की थी 
तुम्हे कैसे बताएं हम लिखा है याद में जलकर ||...............मनोज