नयें इस साल से बेहतर पुराना साल अच्छा था
बुरे इस हाल से अच्छा मेरा वो हाल अच्छा था ||
अता कर दी खुदा ने शौहरतें लेकिन तुम्हे खोया
तुम्हे पाया अगर होता भले कंगाल अच्छा था ||
महल भी खंडहर से रात को लगते मुझे तुम बिन
तुम्हारे प्यार के घर का फटा तिरपाल अच्छा था ||
धरम के नाम पर लाखों किताबें पढ़ चुका लेकिन
वो वृन्दावन विहारी सांवरा गोपाल अच्छा था ||
जुड़ा है आज अंतर्जाल से इंसान दुनिया से
मगर पीपल तले घर गाँव का चौपाल अच्छा था ||
शहर में खो गया हूँ रोटियों की खोज में हर दिन
वो माँ का प्यार अपना पन मेरा गढ़वाल अच्छा था ||
नयें इस साल से बेहतर पुराना साल अच्छा था
बुरे इस हाल से अच्छा मेरा वो हाल अच्छा था ||
मनोज

