प्यास बुझाने को मत कहना, खारे जल की धारा हूँ मै
दुआ मांग लो जो मन में हो , एक टूटता तारा हूँ मै ||
तेरी चाहत के सागर की गहराई क्या नाप सकूँगा
सावन में निकले दरिया का सूखा हुआ किनारा हूँ मै ||
मेरी दुनिया में चाहत की छाँव खोजने मत आ जाना
जल जाओगी तुम भी ऐसा नफरत का अंगारा हूँ मै ||
मेरी ये मुस्कान देख कर तुमने क्या समझा तुम जानो
सच ये है वर्षों से दुःख का , प्यारा राज दुलारा हूँ मै ||
मेरा प्यार अकेलापन है ,और प्रेमिका मेरा मन है
तन्हाई जोगन है मेरी , और उसका इकतारा हूँ मै ||
मेरी ये परिभाषा तुमको ,शायद भाये या ना भाये
लेकिन तुम शर्तों को त्यागो , देखो सिर्फ तुम्हारा हूँ मै ||
प्यास बुझाने को मत कहना, खारे जल की धारा हूँ मै
दुआ मांग लो जो मन में हो , एक टूटता तारा हूँ मै ||
मनोज

