गुरुवार, 7 मार्च 2013

ममता की आधारशिला तुम, प्रेममयी नूतन आशा हो




ममता की आधारशिला तुम, प्रेममयी नूतन आशा हो 
मानवता की केंद्रबिंदु हो , नवजीवन की परिभाषा हो 

माँ बनकर सबसे पहले तुम मिली मुझे पहली परछाई 
नौ माहों की कठिन तपस्या , माँ तुमने निस्वार्थ निभाई 
करुणा की मूरत बनकर जो बचपन को आधार दिया है 
कर्ज कभी ना दे पाऊंगा माँ तुमने जो प्यार किया है ||

सबके जीवन में पग पग पर तुम नूतन सी जिज्ञासा हो 
मानवता की केंद्रबिंदु हो , नवजीवन की परिभाषा हो 

मेरी तुतलाती बोली को सबसे पहले तुमने जाना 
मेरी किलकारी का मतलब क्या है ये तुमने पहचाना 
मीठी लोरी सुना सुना कर मुझे सुलाया तुम ना सोयी 
जब भी मेरे आंसू आये मेरे संग माँ तुम भी रोई ||

शब्द जाल में पहला अक्षर माँ तुम ही पहली भाषा हो 
मानवता की केंद्रबिंदु हो , नवजीवन की परिभाषा हो ||

ऊँगली तेरी पकड़ पकड़ कर तुमसे चलना सीखा मैंने 
जैसे तुम कहती थी सबको कहना वैसे सीखा मैंने 
मुझे खिलाया सबसे पहले तुमने ही नमकीन निवाला 
मेरे पहले जन्म दिवस पर दीप जला कर किया उजाला ||

तेरा प्रेम बहे माँ अविरल लाल भला कैसे प्यासा हो 
मानवता की केंद्रबिंदु हो , नवजीवन की परिभाषा हो ||

राखी के बंधन से जाना नवल प्रेम बंधन का गहना 
बाल सखी , मेरी मनुहारी सुख -दुःख संगी मेरी बहना
कितने ही भावों में नारी प्रेम मुखर होता है जग में 
पुरुष कभी भी नहीं पूर्ण है बिना तेरे जीवन पग पग में ||

जीवन धन्य बनाया तुमने जीने की तुम अभिलाषा हो 
मानवता की केंद्रबिंदु हो , नवजीवन की परिभाषा हो ||

मनोज नौटियाल