मंगलवार, 30 जुलाई 2013

यही उपकार काफी है कि अब उपकार मत करना




यही उपकार काफी है कि अब उपकार मत करना 


हमारे प्यार के बदले हमें तुम प्यार मत करना ||





तुम्हारे अक्स को अब आंसुओं से धो दिया मैंने 

पलट कर फिर निगाहों से निगाहें चार मत करना ||


गुरूर -ए-हुश्न में तुमने सुबह से ख्वाब तोड़े थे 

बिछड़ती शाम से अब तुम उन्हें गुलजार मत करना ||


सुलगती दोपहर में छाँव बनकर याद गर आये 

झरोखे बंद कर देना कभी दीदार मत करना ||


तुम्हारी बेवफाई के चुभे खंजर कई दिल में 

हरे हैं जख्म अब तुम फिर पलट कर वार मत करना ||


मिलें जो हम कभी मरकर मुहोब्बत की अदालत में 

मुझे फिर प्यार करने की सजा स्वीकार मत करना || 


यही उपकार काफी है कि अब उपकार मत करना 

हमारे प्यार के बदले हमें तुम प्यार मत करना ||

             
मनोज