शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

आपका चेहरा



ग़मों की भीड़ में सब कुछ भुला दे आपका चेहरा 
तमन्ना को नयाँ सा हौसला दे आपका चेहरा ||

मुझे तन्हाइयों से बात करना भा रहा है क्यूँ 
कहीं मुझको मुझी से ना मिला दे आपका चेहरा ||

मुहोब्बत की किताबों ने डराया है हमें अक्सर 
नजर भर देखते ही सब भुला दे आपका चेहरा ||

हकीकत की हवाओं ने बुझाया आश का दीपक 
मगर विश्वाश का दीपक जला दे आपका चेहरा ||

घडी भर के लिए गर आप हो जाएँ खफा मुझसे 
मनाने का नयाँ सा सिलसिला दे आपका चेहरा ||

बताएं आपको क्या हाल क्या होता हमारा जब 
कभी मासूमियत से खिलखिला दे आपका चेहरा ||

नजर भर देखने की आप हमको जो सजा दोगे 
हमें मंजूर है जो भी सिला दे आपका चेहरा ||

ग़मों की भीड़ में सब कुछ भुला दे आपका चेहरा 
तमन्ना को नयाँ सा हौसला दे आपका चेहरा ||


मनोज नौटियाल

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रेममय रचना...
    :-)

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  2. ग़मों की भीड़ में सब कुछ भुला दे आपका चेहरा
    तमन्ना को नयाँ सा हौसला दे आपका चेहरा ||

    .......क्या भाव प्रस्तुत किये हैं इस खूबसूरत गज़ल के द्वारा. हर शेर दिल को छूता है.

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