बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने


ऋतू राज ने अंदाज़ बदले
भानु रश्मि  लगी जलने
चहुँ और तांडव उष्णता का
बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने .........

धूलित मलय की लालिमा
चहुँ और तपती वेदना
मेघ गर्जन लगा करने
बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने .........

खग विहग विचलित ताकते
वन  वृक्ष छाँव निहारते
जल स्रोत पात्र लगे टपकने
बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने .........

चहुँ और सूनी दोपहर
अनगिनत विषधर का गमन
बहु ब्याधि घर घर लगी विचरने
बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने .........

चराचर में प्रार्थना स्वर
बरस जा ऐ मेघ घर घर
बन  सावन आ जाओ तृप्त करने
बन भीष्म ग्रीष्म लगा मचलने ......... मनोज