
तुतला कर कहना सीखा हूँ
अंजलि भर बूदों का पानी
अभी अभी बहना सीखा हूँ
अभी अभी चलना सीखा हूँ
वात्सल्य का प्यासा हूँ
नट खट की परिभाषा हूँ
शोभा हूँ अपने आँगन की
पौधा हूँ बढ़ना सीखा हूँ
अभी अभी चलना सीखा हूँ
देखा देखी करता हूँ
आवाजों से भी डरता हूँ
भाव मेरे गंगा से निर्मल
निस्वार्थ भाव मिलना सीखा हूँ
अभी अभी चलना सीखा हूँ .......manoj
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