गुरुवार, 13 जून 2013

नयें इस साल से बेहतर पुराना साल अच्छा था






नयें इस साल से बेहतर पुराना साल अच्छा था 

बुरे इस हाल से अच्छा मेरा वो हाल अच्छा था ||

अता कर दी खुदा ने शौहरतें लेकिन तुम्हे खोया 
तुम्हे पाया अगर होता भले कंगाल अच्छा था ||

महल भी खंडहर से रात को लगते मुझे तुम बिन 
तुम्हारे प्यार के घर का फटा तिरपाल अच्छा था ||

धरम के नाम पर लाखों किताबें पढ़ चुका लेकिन 
वो वृन्दावन विहारी सांवरा गोपाल अच्छा था ||

जुड़ा है आज अंतर्जाल से इंसान दुनिया से 
मगर पीपल तले घर गाँव का चौपाल अच्छा था ||

शहर में खो गया हूँ रोटियों की खोज में हर दिन 
वो माँ का प्यार अपना पन मेरा गढ़वाल अच्छा था ||

नयें इस साल से बेहतर पुराना साल अच्छा था 
बुरे इस हाल से अच्छा मेरा वो हाल अच्छा था ||


मनोज